विडियो: एक के बदले दस सर लाने वाले अब पाक सेना के साथ थिरक रहे हैं, दलाल मीडिया ने चुप्पी साधी

गिरीश मालवीय: एक सिर के बदले 10 सिर लाने की बात करने वाले मोदी जी भारत के सैनिकों को पाकिस्तान के सैनिकों के साथ ‘तेरी आंख्या का यो काजल’ पर थिरकवा रहे हैं|

कुछ दिनो पहले तक सिध्दू को इमरान के शपथग्रहण समारोह में जाने पर देश का गद्दार साबित करने करने वाले मोदी समर्थकों को यह नही दिख रहा है कि मोदी सरकार चीन के दबाव में अपने जवानों को रूस भेज कर पाकिस्तान के साथ संयुक्त युध्दाभ्यास करवा रही है|

रूस के चेबरकुल में इस कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत विगत 24 अगस्त को ही हो चुकी है, लेकिन इस बारे में देश का मीडिया चुप्पी साध कर बैठ गया है| सेना के अधिकारी कह रहे हैं कि भारतीय सैनिकों ने इससे पहले कभी किसी ऐसे बहुराष्ट्रीय सैन्य युद्धाभ्यास में हिस्सा नहीं लिया है जिसमें पाकिस्तान भी साथ रहा हो भारत की तरफ से मोदी सरकार ने कुल 200 सैनिकों में 167 थलसेना के और 33 वायुसेना के जवानो को युद्धाभ्यास के लिए भेजा हैं|

पाकिस्तान लगातार बॉर्डर पर सीजफायर का उल्लंघन करता रहा है और भारत में घुसपैठी भेजकर आतंक फैलाने की कोशिश लगातार जारी है लेकिन 56 ईंच सीना की बात करने वाली मोदी सरकार इस मुद्दे पर खामोश है बार बार पाकिस्तान को अपनी ओकात याद दिलाने वाले गोदी मीडिया को इस मुद्दे पर सांप सूंघ गया है|

जीडीपी और चुवाव

चुनाव के पहले जीडीपी, विनिर्माण, आदि बढ़ने ही थे सो बढ़ गए! अर्थव्यवस्था अचानक घनघोर तेज और मजबूत हो गई! लेकिन फिर रुपया गिरता ही क्यों जा रहा है? निर्यात के मुक़ाबले आयात बढ़ता ही क्यों जा रहा है? वित्तीय घाटा क्यों बढ़ रहा है? सबसे बड़ा सवाल – उत्पादन इतना बढ़ रहा है तो रोजगार क्यों नहीं मिल रहे?

ऐसे सोचें कि शरीर का कोई अंग बढ्ने लगे पर हड्डी, पेशी, रक्त नलिकाएं व शरीर के अन्य अंग उसी अनुपात में न बढ़ें तो ऐसी वृद्धि को क्या कहा जाता है? ऐसी वृद्धि को सेहत बढ़ना नहीं, कैंसर या ट्यूमर कहा जाता है जो भयंकर मर्णांतक पीड़ा देता है|

यही स्थिति अर्थव्यवस्था की हो गई है। अधिकांश जनता के लिए बिना रोजगार, शिक्षा-स्वास्थ्य-आवास-सफाई आदि सुविधाएं निर्माण करने वाली तेज वृद्धि मजबूत नहीं कैंसरग्रस्त अर्थव्यवस्था बना रही है जिसमें चंद पूँजीपतियों की दौलत बढ़ती जाती है और सौ करोड़ मेहनतकश जनता के हिस्से में बस दुख-तकलीफ आती है| लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं|

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