देखें मृत्यु के बाद किसी शरीर की आत्मा कहाँ जाती है? धर्म ग्रंथों से हुआ ये बड़ा खुलासा

इस बात को हम सब जानते है की जिस इंसान ने पृथ्वी पर जन्म लिया है उस इंसान को एक ना एक दिन मरना जरूर पड़ेगा| धर्म ग्रंथो में बताया गया है की जन्म के समय ही ईश्वर हमारे म्रत्यु का समय निश्चित कर देता है|

कहा जाता है की हमारे शरीर की म्रत्यु होती है आत्मा की नहीं आत्मा अमर है, लेकिन जब हमारे शरीर की म्रत्यु होती है तब आत्मा भगवान के पास जाती है| तब उसे अपने कर्म अनुसार फल मिलता है| जिस व्यक्ति ने अच्छे कर्म किये है उस व्यक्ति की आत्मा को दुखों का सामना नहीं करना पड़ता|

और यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में बुरे कर्म करता है तो मरने के बाद उसे उन कर्मों की सजा भी भुगतनी पड़ती है| हर इंसान के मन एक बार यह सवाल जरूर उठता होगा की मरने के बाद आत्मा कहाँ जाती है?

आज यह Article पड़ने के बाद यह सवाल आपके मन से हमेशा के लिए दूर हो जायेगा और किस तरह से उसके जीवन मरण का पूरा ब्यौरा उसके आंखों के सामने दिया जाता है| मरे हुए इंसान की आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार सजा तो दी जाती है लेकिन इससे पहले उसके कर्मो का सम्पूर्ण व्रतांत भी बताया जाता है|

तो चलिए आज हम आप सभी को बताते है की मरने के बाद आत्मा को किस तरह की यात्रा करनी पड़ती है| म्रत्यु के बाद जब इंसान शरीर धारण करता है उसका पूर्ण और सही ज्ञान तो परमेश्वर को ही है| लेकिन जैसा ज्ञान हमें शास्त्रों से प्राप्त होता है वही हम आप सभी को बताते हैं|

बहुत से शास्त्रों और पुराणों में जन्म, म्रत्यु एवं अन्य शरीर धारण करने का वर्णन मिलता है| हिंदू धर्म ग्रंथ एवं गरुण पुराण में इंसान की मृत्यु व उसके बाद होने वाले कर्मों के बारे में बताया गया है| वर्तमान शरीर को छोड़कर अन्य शरीर प्राप्ति में कितना समय लगता है और उसकी आत्मा के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है|

गरुण पुराण में बताया गया है इंसान की मृत्यु के समय यम के दो दूत आत्मा को लेने के लिए आते हैं| जब कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में अच्छे कर्म करता है तो उसे यम के दोनों दूत बड़े ही आरामपूर्वक अपने साथ ले जाते हैं| लेकिन जो व्यक्ति बुरे कर्म करता है उसे वो दोनों दूत बहुत ही कष्ट देते हैं|

और उस इंसान की आत्मा के साथ बड़ा ही दुर्व्यवहार करते हुए अपने साथ लेकर जाते हैं| शास्त्रों के मुताविक बताया जाता है की इंसान की आत्मा को सबसे पहले यमराज के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और 24 घण्टे तक उसे वहां रख कर उसे उसके जीवन में किए गए कर्मों के अनुसार सभी कर्म साक्षात रूप से दिखाए जाते हैं|

उसके कर्मों का फल उसे दिया जाता है उसके बाद उसे दोनों दूत वहीं पर छोड़ जाते हैं| जहां से लाया जाता है| फिर 13 दिन तक उसकी सभी क्रियाविधि संपन्न होने के बाद उसे यम के दूत फिर से आते है और उसे ले जाते हैं| कहा जाता है की यमलोक  जाने वाली आता सिर्फ एक तुलसी के पत्ते के बराबर होती है|

ऐसा भी बताया जाता है की यमलोक से निकलते वक्त इंसान की आत्मा को उसके कर्मों के परिणाम स्वरुप अनेक यातनाये दी जाती है| 1 साल तक आत्मा को यमलोक में रहना पड़ता है और यमलोक में उसे अनेक प्रकार की भयानक चीज़ें दिखाई जाती है| इस पूरी प्रक्रिया के बाद निर्धारित किया जाता है की उस इंसान की आत्मा को स्वर्ग भेजा जाए या नरक और उसे कोंसी सी योनि प्रदान की जाए|

गरुण पूरण में यह भी बताया गया है की जो व्यक्ति अपने जीवन काल में अच्छे कर्म करता है उस व्यक्ति के साथ यह प्रक्रिया नहीं की जाती उसे सीधा विष्णु लोक में ले जाया जाता है| और जिस व्यक्ति की भी आत्मा विष्णु लोक में पहुँच  जाती है उस व्यक्ति को अगला जन्म नहीं लेना पड़ता|

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