दलाई लामा की जीवनी | Dalai Lama Biography In Hindi

दलाई लामा जीवनी और इतिहाश हिंदी में –

पूरा नाम – ल्हामो धोंड़ख

जन्म एवं जन्मस्थान – 6 जुलाई १९३५ , तिब्बत के ताकस्तेर छेत्र में एक ओमान परिवार में हुआ है.

पिता का नाम- चोक्योंग त्सेरिंग

माता का नाम- डिकी त्सेरिंग

शिक्षा के बारे में – दलाई लामा की शिक्षा की शुरुबात 6 साल की उम्र में ही हो गई थी. उन्होंने १९५९ में गेशे ल्हरापा की डिग्री दुसरे शब्दों में कहा जाये तो (बोद्ध दर्शन) भी हासिल कर लिए थे. दलाई लामा की शिक्षा की शुरुआत बोद्ध धर्म से की और आगे की शिक्षा उन्होंने ड्रेन्पुंग, सेरा और गंडेन में पूरा किया. शांति का वाताबरण बनाने में उनकी बहुत बड़ी भूमिका है. कहा जाता है की शांति के छेत्र में लगातार और पूर्णरूप से योगदान देने वाले दलाई लामा आज के दिनों में जीता जागता एक सबसे बड़ा उदहारण है. दलाई लामा तिब्बत के १४वे धर्मगुरु है.

दलाई लामा ने राजनीती की छेत्र में भी नेता की जिम्मेदारी निभाई –

दलाई लामा ने राजनीती के छेत्र में भी अपना पूरा योगदान दिया है. दलाई लामा ने अपनी देश देश की रक्षा के लिए भी बहुत कुछ किया है. कहा जाता है सन १९४९ तक चीन ने तिब्बत पर बहुत हामले किये है.  तब तिब्बत के लोगो ने दलाई लामा से राजनीती के छेत्र में आने को कहा लेकिन इस बारे में दलाई लामा ने पूरी तरह से सोच विचार कर निर्णय लिया. की वे चीन जायेंगे और बहा के नेताओं से मिलेंगे और इस विषय पर अच्छी तरीके से चर्चा भी करेंगे.

लेकिन इसके बाद भी चीन ने अपना निर्णय नहीं बदला और १९४९ में चीन ने तिब्बत के ऊपर आक्रमण कर दिया. आक्रमण में चीन ने तिब्बत और तिब्बती आन्दोलन को  इस तरह तबाह कर दिया की वहां के लोग पलायन को मजबूर हो गए. जब तिब्बती लोगों को देश से पलायन करना पड़ा. उस समय दलाई लामा ने बहुत ही ख़ूबसूरती से आहिंसा का रास्ता अपनाया.  दलाई लामा ने अपने पूरे जीवन में बचपन से लेकर अंतिम समय तक हमेशा ही शांति, आहिंसा और लोगों की खुशहाली के लिए ही काम किया है. धर्मगुरु दलाई लामा ने अपने जीवन में लगभग ५२ देशों की यात्रा सफलतापुर्वक की है. इसके अलावा वे कई देशों की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, धर्म के लोगों से, और अनेक वैज्ञानिकों से भी मुलाकात की है.

इस हमले के बाद तिब्बत के लोग हिमाचल प्रदेश चले गए. और वहां की एक धर्मशाला में बस गए.  चीन द्वारा किये गए तिब्बत के ऊपर अनेक हमलों से परेशान होकर दलाई लामा ने इस बात को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में उठाया. दलाई लामा ने महासभा से अपील की. कि चीन हमारे ऊपर हमले पर हमले कर रहा है. इस मसले को हल किया जाये.  यह मसला आज भी अधर में अटका है.

पूरी दुनिया की नज़रों में दलाई लामा के प्रति लोकप्रियता –

हर तिब्बती लोगो के मन में दलाई लामा के प्रति सच्ची भावना, आस्था और गहरा लगाव है. शांति के छेत्र में भी उन्होंने बहुत बड़े बड़े काम किये है. और उन्हें 1989 में नावेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.  दलाई लामा ने जिस तरह ” भूमि के सोंदर्य के लिए और नदियों, झीलों की पवित्रता के लिए अपना बहुत योगदान दिया है. दलाई लामा ने दूसरों के प्रति हिंसा न करके आहिंसा का रास्ता  अपनाया है. इसके अलावा भी तिब्बती लोगों का उनके साथ होना बहुत ही कमाल का है.

दलाई के कुछ महत्वपूर्ण सन्देश –

  • दलाई लामा का साफ़ साफ़ शब्दों में कहना है. की अगर आप दूसरों की मदद कर सकते है. तो अवश्य करिये और यदि आप मदद नहीं कर सकते है तो कम से कम नुकसान मत पहुंचाहिये.
  • आप अपनी क्षमताओं को जानकार और उनमे विश्वास करके ही एक बेहतर और नए संसार का निर्माण कर सकते है.
  • दलाई नामा का कहना है, जब तक हम अपने अन्दर शांति पैदा नहीं कर लेते, तब तक हम इस दुनिया में कभी भी शांति को प्राप्त नहीं कर सकते.
  • हमें अपने जीवन में नियमो को अच्छी तरह जानना चाहिए, ताकि जब भी जरुरत पड़े आप उसे अपने प्रवाभी ढंग से तोड़ सके.
  • सामने आने वाली हर चुनोतियो के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिये. अगर लक्ष्य बडा है तो हो सकता है, की बो हमारे जीवित रहते पूरा हो या न हो लेकिन उसे पाने के लिए हमेशा और लगातार कोशिश करते रहना चाहिए.
  • प्यार और सहानुभूति जरुरी है धन दौलत जरुरी नहीं है. प्यार और सहानभूति के बिना मानवता जीवित नहीं रह सकती.
  • अगर समस्या निश्चित है, अगर समस्या के समाधान के लिए आप कुछ कर सकते है, तो आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है और अगर समस्या निश्चित नहीं है तो व्यर्थ की चिंता करने से कुछ भी हासिल नहीं सकता.इसलिए चिंता करने से कोई भी लाभ नहीं है.
  • समय बिना रुके निकलता जाता है, जब हम गलतियाँ करते है तो उस समय को नहीं बदल सकते लेकिन हम फिर से कोशिश कर सकते है हम जो भी करते है सीखते है बो हम वर्तमान के अच्छे इस्तमाल के लिए करते है.

दलाई लामा द्वारा लिखी गयीं कुछ महत्वपूर्ण रचनाएँ –

तेनजिन ग्यात्सो ने बहुत साड़ी पुस्तकों की रचनाएँ की है. उन में से कुछ इस प्रकार है. – “हार्ट ऑफ़ मैडिटेशन”, हार्ट ऑफ़ हैप्पीनेस, हार्ट ऑफ़ लीविंग,  “बुद्धिज़्म ऑफ़ तिब्बत”, आदि.

दलाई लामा (तेनजिन ग्यात्सो) के पुरस्कार और उप्लाब्धियाँ  (Dalai Lama Tenjin Gyatso Awards)

  1. समुदाय नेतृत्व के लिए रोमन मेगसेस पुरस्कार (१९५८)
  2. .शांति का नावेल पुरस्कार (१९८९)
  3. विश्व सुरक्षा के लिए  वार्षिक शांति पुरस्कार (१९९४)
  4.  चार स्वतंत्रता पुरस्कार (१९९४)
  5. . लाइफ अचीवमेंट अवार्ड (१९९९)
  6.  इंटरनेशनल लीग फॉर ह्यूमन राईट अवार्ड (२००3)
  7.  मानव अधिकार के लिए जेम ब्रुनाते पुरस्कार  (२००३)
  8.  अमेरिकी कांग्रेस के स्वर्ण पदक (२००६)
  9.  नानक इंटरफ़ेस पुरस्कार इनोगुरल होफ्स्त्त्रा (२००८)
  10. जर्मन मीडिया पुरस्कार बर्लिन (२००९)
  11. जान लंगोस मानवाधिकार पुरस्कार (२००९)
  12.  मानद उपाधि (२०१०,२०११,२०१३)
  13.  इंटरनेशनल फ्रीडम कंडक्टर अवार्ड (२०१०)
  14.  टेम्पलटन पुरस्कार (२०१४)

दलाई लामा का विवादों में व्यतीत जीवन –

पीपुल्स दैनिक द्वारा दलाई लामा पर आरोप लगाया गया की वो तिब्बत बोद्ध और चीन के बोद्ध धर्म के साथ धोखा कर रहे है. २००८ में दलाई लामा ने पहली बार १९१४ के शिमला समझोते का हवाला देते हुए कहा की दक्षिण तिब्बत अरुणाचल प्रदेश का ही एक  भाग है. जिसके ऊपर बहुत से विवाद हुए और यह क्षेत्र बहुत ही विवादित रहा. और चीन हमेशा से ही दलाई लामा के भारत लौटने के विरोध में बोल रह है. दलाई लामा ने अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा से भी काफी चर्चाएँ की. और वह चर्चाएँ बहुत ही विवादित रही है.

दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो का करियर (dalai lama carrier) –

उन्हें अब तक अपने जीवन में ६० से अधिक डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हकी हुई है. और बो अब तक ५० से अधिक पुस्तकों की रचनाएँ पूर्णरूप कर चुके है. दलाई लामा जो चीन के साथ शांति वार्ता करने उनके करियर का एक बहुत बड़ा  हिस्सा है. जिसके लिए उन्हें नावेल का शांति पुरस्कार से भी सम्मानपूर्वक सम्मानित किया गया था. दलाई लामा ने १९८७ में अमेरिका जाकर वाशिंगटन डी सी पहुचे और उन्होंने अपने वक्तव्य में परमाणु सकती की दोड़ की उन्होंने निंदा करते हुए इसे चिंता जनक बताया. दलाई लामा की इस बात पर सब लोगो ने उनके आहिंसात्मक स्वाभाव की बहुत ही तारीफ़ की. सन १९५० में उन्हें वहा सत्ता ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया गया था. सन १९६३ में दलाई लामा ने तिब्बत की लोक्तान्त्रिता के लिए पूर्ण रूप से मांग की और संविधान की रूपरेखा को तैयार किया. और इस सम्विधान में सन १९९० में कुछ सुधार किया गया.  और सन १९९२ में तिब्बत लोक्तान्त्रित  घोषित हो गया.

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